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इस सिंचाई से पौधों को किस वक्त क्या चाहिए उस हिसाब से यह मिल जाता है. लिहाजा, उनकी ज़्यादा से ज़्यादा बढ़त होती है.

 इस सिंचाई से पौधों को किस वक्त क्या चाहिए उस हिसाब से यह मिल जाता है. लिहाजा, उनकी ज़्यादा से ज़्यादा बढ़त होती है.

पंजाब में भूजल स्तर काफ़ी नीचे गिरता जा रहा है क्योंकि यहाँ धान की खूब खेती होती है. धान एक ऐसी फसल है, जिसे खूब पानी चाहिए.

गन्ने और सोयाबीन को भी काफ़ी पानी चाहिए. धान की खेती के लिए खेत को पानी से भरा होना चाहिए लेकिन ड्रिप इरिगेशन से पानी बचाने में मदद मिलती है.

भारत में एक दशक पहले ड्रिप इरिगेशन शुरू हुई थी लेकिन भारत में जितनी ज़मीन में खेती होती है, उसका महज चार फ़ीसदी हिस्से को ही यह कवर करती है.

पुष्पेंद्र सिंह कहते हैं ड्रिप इरिगेशन अच्छी तकनीक है लेकिन यह धान की सिंचाई के लिए सुविधाजनक नहीं होती. ड्रिप इरिगेशन का इस्तेमाल गन्ने और और कुछ दूसरी फसलों के लिए हो रहा है लेकिन यह धान के लिए कारगर नहीं रहेगी.

पुष्पेंद्र कहते हैं कि यह काफ़ी खर्चीला है. वो पूछते हैं, ''इसका ख़र्च कौन उठाएगा? नई तकनीक धीरे-धीरे तो आएगी ही, लेकिन किसान इसका ख़र्चा उठा सके इसके लिए उसकी मदद करनी होगी.''

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